मध्यप्रदेश

करैरा SDOP डॉ. आयुष जाखड़ की इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा…..


मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में पदस्थ एसडीओपी डॉ. आयुष जाखड़ इन दिनों सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। वजह है—स्थानीय बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी पर की गई सख्त कार्रवाई।
बताया जा रहा है कि दिनेश लोधी पर थार वाहन से पांच लोगों को कुचलने का आरोप है। इस मामले में डॉ. आयुष जाखड़ ने बिना दबाव में आए केस दर्ज किया और पूछताछ के लिए दिनेश लोधी को थाने बुलाया। साथ ही सख्त लहजे में चेतावनी भी दी। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गर्मा गया और विधायक की नाराजगी खुलकर सामने आई।
कौन हैं डॉ. आयुष जाखड़?
डॉ. आयुष जाखड़ 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और वर्तमान में करैरा (जिला शिवपुरी) में एसडीओपी के पद पर तैनात हैं। उनकी पहचान एक कड़क और निष्पक्ष अधिकारी के रूप में बन रही है।
मूल निवासी: श्रीगंगानगर, राजस्थान
शैक्षणिक पृष्ठभूमि: एमबीबीएस (एम्स, जोधपुर)
उपलब्धि: राजस्थान पीएमटी टॉपर
यूपीएससी चयन: 2022
कैडर: मध्य प्रदेश
चिकित्सा क्षेत्र से आने के बावजूद उन्होंने सिविल सेवा का रास्ता चुना और 2018 में दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी शुरू की। अपने पहले ही प्रयासों में सफलता हासिल कर उन्होंने आईपीएस बनने का सपना पूरा किया।
सेवा और कार्यशैली
आईपीएस बनने के बाद आयुष जाखड़ ने मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिम्मेदारी निभाई है।
धार में एएसपी के रूप में सेवाएं
गुना में चर्चित कैश कांड की जांच
वर्तमान में करैरा में एसडीओपी
उनकी कार्यशैली सख्त, निष्पक्ष और कानून के प्रति प्रतिबद्ध मानी जाती है। हालिया कार्रवाई ने उनकी इसी छवि को और मजबूत किया है।
निजी जीवन
डॉ. आयुष जाखड़ की पत्नी अनु बेनीवाल भी 2022 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं और मध्य प्रदेश कैडर में ही तैनात हैं। वर्तमान में वे ग्वालियर में एएसपी के रूप में कार्यरत हैं।
दोनों ने 27 नवंबर 2023 को विवाह किया था, और यह जोड़ी प्रशासनिक सेवा में एक प्रेरणादायक उदाहरण मानी जाती है।
क्यों हो रही है चर्चा?
करैरा में हुई इस कार्रवाई को लेकर डॉ. आयुष जाखड़ की सोशल मीडिया पर जमकर सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि उन्होंने राजनीतिक दबाव के बावजूद कानून को प्राथमिकता दी। वहीं, दूसरी ओर इस मामले ने स्थानीय राजनीति में भी हलचल मचा दी है।
डॉ. आयुष जाखड़ का यह कदम एक बार फिर यह संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं। उनकी कार्यशैली आने वाले समय में प्रशासनिक ईमानदारी की मिसाल बन सकती है

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